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सादुलशहर क्षेत्र में किन्नू बागवानी में इस वर्ष किन्नू फल के फ्लॉवर पौधों में अभीतक नही आने से बागवानी किसानों के चेहरे मुरझा रहे है ।

सादुलशहर क्षेत्र में किन्नू बागवानी में इस वर्ष किन्नू फल के फ्लॉवर पौधों में अभीतक नही आने से बागवानी किसानों के चेहरे मुरझा रहे है ।

सादुलशहर क्षेत्र के प्रगतिशील बागवानी किसान ओमप्रकाश सहारण ने बताया कि किन्नू बगीचों में मार्च माह की शुरुआत से लेकर लगभग 20 मार्च तक फल के रूप में फ्लॉवर आ जाते है लेकिन इस बार बगीचों में बढ़वार तो हुई है लेकिन फल बिल्कुल भी नही आने से चिन्ता हो रही है एक अन्य बागवानी किसान प्रमोद कुमार का कहना है कि इस बार बाग में फल बिल्कुल भी नही है और पौधों में बढ़वार भी गत वर्ष की तुलना में बहुत कम है जिसके पीछे मौसम में समय से पहले तापमान में बढ़ोतरी हो सकता है ।

ज्ञात रहे किन्नू बगीचों की खेती एक साल में तैयार होती है ऐसे में अगर क्षेत्र के बगीचों में फल नही लगे तो बागवानी किसान को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है क्योंकि एक साल की खेती होने के कारण किसान को दो साल का इंतज़ार करना पड़ेगा । पिछले 5 वर्षों से श्रीगंगानगर जिले में सादुलशहर क्षेत्र के किसानों ने किन्नू बागवानी में बड़ी रुचि दिखाई है एवं बड़े कृषि भाग में किन्नू के बगीचों को अपने खेतों में लगाया है लेकिन मौजूदा संकट को देखते हुए बागवानी किसानों में निराशा का माहौल है ।

इनका कहना है…

हमारे जिले का किन्नू फल गंगानगरी किन्नू पूरे देश मे प्रसिद्ध हो रहा है जिसको लेकर जिले के किसानों ने बागवानी में बड़ी रुचि दिखाई है लेकिन अगर हम बात करे बागवान किसान की तो पिछले दो किन्नू फल के सीजन संकट भरे रहे है एक सीजन तो कोरोना संकट में खत्म हो गया था उस समय बागवानी किसानों के बगीचों में फल पककर तैयार थे लेकिन देश मे कोरोना के चलते लॉकडाउन लगने से किसानों बहुत बड़ी हानि उठानी पड़ी थी और इस बार बागवानी किसान को किसान आंदोलन के चलते फल के भाव 5 से 6 रुपये प्रति किलो मिला था जो बगीचों की खर्च लागत को देखते हुए बहुत कम थे और इस बार किन्नू पौधों पर फल का फाल नही आने से बागवानी किसान को बहुत भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है । हमारा किसान संगठन ऐसी परिस्थितियों में राज्य सरकार से मांग करता है कि बागवानी किसान को हो रहे आर्थिक नुकसान का आंकलन कर आर्थिक सहायता प्रदान करें ताकि खेती के इस सेक्टर को बर्बाद होने से बचाया जा सके ।

:- शिवप्रकाश सहारण
अध्यक्ष, ग्रामीण किसान मजदूर समिति सादुलशहर

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